समाज कार्य की एक प्रमुख विधि है ‘सामूहिक सेवा कार्य’। समाज कार्य के सामान्य पक्ष पर तो कुछ मानक ग्रंथ हिन्दी में उपलब्ध हैं, किन्तु समाज कार्य की विधियों पर कोई भी मानक ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक इसी अभाव की पूर्ति की दिशा में एक प्रयास है।
पुस्तक के 22 अध्यायों में ‘सामूहिक सेवा कार्य’ के सभी पहलुओं पर, विभिन्न विद्वानों के मतों के परिप्रेक्ष्य में समूह कार्य के सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए उनमें एकमत्य स्थापित करते हुए प्रकाश डाला गया है, जो अपने ढंग का अद्वितीय विवेचन है।
सब कुछ मिलाकर लेखकद्वय ने अपने ढंग से एक अनूठा प्रयास करने का कार्य किया है। विश्वास है कि भारतीय परिवेश में इस विषय पर अंग्रेजी और हिन्दी दोनों ही भाषाओं में ऐसा ग्रंथ उपलब्ध नहीं होगा। लेखकों का यह प्रयास है कि भारत में समाज कार्य को एक पूर्ण व्यवसाय के रूप में स्वीकार करने में पाठ्य सामग्री की दृष्टि से जो कमियां हैं उन्हें दूर किया जाए।
विश्वास है कि उपर्युक्त पुस्तकों की रचना एवं प्रकाशन के पश्चात् कम से कम पाठ्य सामग्री की दृष्टि से समाज-कार्य पूर्णतया एक व्यवसाय का स्वरूप ले लेगा।
CONTENTS
1. सामूहिक सेवा कार्य की विकासात्मक पृष्ठभूमि
2. समूह कार्य का अर्थ एवं दर्शन
3. समूह के प्रत्यय का अर्थ निरूपण, गत्यात्मकता और अनौपचारिक समूह
4. समूह निर्माण एवं उसके चरण
5. समूह की विशेषताएं और उसके प्रकार
6. सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य के आधरभूत सिद्धांत
7. सामाजिक समूह कार्य के कौशल और माॅडल्स
8. सामाजिक सामूहिक कार्य में कार्यकर्ता की भूमिका
9. सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य एवं सामूहिक सेवा कार्य
10. सामाजिक सामूहिक कार्य की विचारधाराएं
11. समूह कार्य के क्षेत्र
12. सामूहिक सेवा कार्य में कार्यक्रम नियोजन और विकास
13. नेतृत्व
14. स्वयं सहायता समूह
15. समूह निदान एवं सामूहिक प्रक्रिया
16. सामाजिक सामूहिक कार्य की विविध् अवधारणाएं
17. सामाजिक सामूहिक कार्य में मूल्यांकन और अभिलेखन
18. सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य में समूह चिकित्सा
19. समूह संघर्ष और निराकरण
20. सामूहिक सामाजिक कार्य की मूल मान्यताएं
21. सामूहिक सेवा कार्य और सामाजिक न्याय
22. समूह कार्य के कुछ अन्य पक्ष
| DETAILS | |
| AUTHOR'S NAME | BALESHWAR PANDEY, TEJASKAR PANDEY |
| ISBN | 9788131608944 |
| EDITION | 2018 |
| LANGUAGE | HINDI |
| BINDING | HB |
| PAGES | 380 |
