प्रस्तुत पुस्तक को सात अध्यायों में विभाजित किया गया है। इन सात अध्यायों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व के ऐतिहासिक परिपेक्ष को समझाने का प्रयास किया गया है तथा भारतीय इतिहास में एक सत्यशोधक की भाँति उनकी महत्ता जो इतिहास निर्माण की प्रक्रिया में एक आवश्यक तत्व के रूप में है, उसको भी स्पष्ट करने का प्रयास हुआ है।
प्रस्तुत पुस्तक के द्वारा उन परिस्थितियों को सर्वप्रथम बताने का प्रयास हुआ है, जिसका प्रभाव ज्योतिबा फुले के व्यक्तित्व पर पड़ा। इसलिए 19वीं सदी के महाराष्ट्र की भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहलुओं का विश्लेषण करना आवश्यक हो जाता है। इस समय महाराष्ट्र का शासनतन्त्र पेशवाओं के प्रशासनिक संरचना पर आधारित था तथा उस समय इस प्रशासनिक व्यवस्था के तहत समाज पर ब्राह्मणवाद का वर्चस्व था। जिसको ब्रिटिश शासनतन्त्र भी समाप्त नहीं कर पाया था। राजनीतिक रूप से सत्ता का हस्तांतरण भले ही पेशवाओं से ब्रिटिशों के हाथ में आया हो, परन्तु मूलभूत ढाँचे में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था।
| DETAILS | |
| AUTHOR'S NAME | डॉ. बालकेश्वर |
| ISBN | 978-93-88998-83-3 |
| EDITION | 2019 |
| LANGUAGE | HINDI |
| BINDING | HB |
| SIZE | DEMY |
| PAGES | 254 |
| PUBLISHER | AKHAND PUBLISHING HOUSE |
