काव्यशास्त्र में छः सम्प्रदायों का अत्यधिक महत्व है, काव्य के केंद्र में अलङ्कार, रस, औचित्य, वक्रोक्ति, रीति और ध्वनि को प्रतिष्ठापित करने के लिए विभिन्न काव्यशास्त्री अनेकशः सम्प्रदायों का समर्थन करते हैं। निबन्ध षट्कम के लेखन में काव्यशास्त्रियों के दार्शनिक पृष्ठभूमि और पूर्वाग्रह को दृष्टिगत रखते हुए उनके तक को प्रस्तुत। किया गया है। इसका प्रयास किया गया है कि विद्यार्थी जब किसी।
सम्प्रदाय विशेष के विषय में पढ़े तो उस सम्प्रदाय के संस्थापक आचार्य किस भारतीय दर्शन से प्रभावित है; यह भी उसके मनस में विद्यमान रहे, तभी पाठक सहजता से काव्यशास्त्रीय सिद्धान्तों को समझ सकेगा।
| DETAILS | |
| AUTHOR'S NAME | डॉ. सम्पूर्णानन्द तिवारी |
| ISBN | 978-93-88998-22-2 |
| EDITION | 2019 |
| LANGUAGE | HINDI |
| BINDING | PB |
| SIZE | DEMY |
| PAGES | 68 |
| PUBLISHER | AKHAND PUBLISHING HOUSE |
