प्रस्तुत संग्रह ‘समकालीन सन्दर्भ और मध्यकालीन हिन्दी कविता अनेक परिवर्तनों, परिवर्धनों, सुझावों से परिपूर्ण है। अध्ययन व लेखन के क्षेत्र में कोई भी प्रयास अंतिम होने का दावा नहीं रखता। मानव की कुछ सीमायें है और वे मेरे साथ भी है। जो कुछ लिखा जा रहा है, वह सब समकालीन नहीं है। समकालीनता एक जीवन दृष्टि है जहाँ कविता अपने समय का आकलन करती है- तर्क और संवेदना की सम्मिलिता भूमि पर। हिन्दी, भारत ही नहीं, दुनियाँ में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली एक भाषा है, हिन्दी साहित्य का इतिहास देखा जाय तो प्राचीन काल से ही हिन्दी भाषा विभिन्न धर्मों और उसके अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण रही है, साथ ही साथ अपनी रचना के माध्यम से समाज में भाई चारा और मेल-जोल को भी हिन्दी ने आगे बढ़ाया, इनमें भी मध्यकालीन कवियों का बड़ा योगदान गिनाया जा सकता है। सूरदास, कबीरदास, रसखान, तुलसीदास, मीराबाई, रैदास, हरिदास आदि कवियों का बड़ा योगदान रहा है। जिनकी रचनाओं में समकालीनता दिखायी पड़ती है।
| DETAILS | |
| EDITED BY | डॉ. दुर्गेश कुमार राय |
| ISBN | 978-93-81416-97-6 |
| EDITION | 2018 |
| LANGUAGE | HINDI |
| BINDING | HB |
| SIZE | DEMY |
| PAGES | 322 |
| PUBLISHER | AKHAND PUBLISHING HOUSE |
