पुस्तक परिचय
प्राचीन भारत में शिल्प और शिल्पकारों पर किये गये इस अध्ययन में प्राचीन भारत के सामाजिक इतिहास के अत्यन्त महत्वपूर्ण आयाम को प्रस्तुत किया गया है। सामान्य रूप से शिल्पों के स्वरूपों और शिल्पकारों के संगठनों की विवेचना से आगे बढ़ते हुए यह पुस्तक प्रागैतिहासिक काल से पूर्व मध्यकाल तक होने वाले सामाजिक, तकनीकी और आर्थिक परिवर्तनों पर प्रकाश डालती है। पुस्तक में शिल्पकारों की पृष्ठभूमि और भौतिक स्थितियों में होने वाले परिवर्तनों के साथ उनकी सामाजिक प्रस्थिति में होते रहे परिवर्तनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक इस विषय पर हुए अन्य अध्ययनों से भिन्न महत्व रखती है।
लेखक परिचय
डॉ. सन्तोष कुमार भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा 2016 में आयोजित जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) परीक्षा पास हैं वर्ष 2019 में महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से प्राचीन इतिहास विषय में पी-एच.डी. किये है वर्तमान में पं. रमाशंकर मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पचरॉव, वाराणसी सम्बद्ध महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्राचीन इतिहास विषय में प्रवक्ता पद पर कार्यरत है। इतिहास समाज राजनीति के अध्ययन में विशेष ज्ञान व रूचि रखते हैं
| DETAILS | |
| AUTHOR'S NAME | डॉ. सन्तोष कुमार |
| ISBN | 978-81-19098-90-3 |
| EDITION | 2025 |
| LANGUAGE | HINDI |
| BINDING | HB |
| SIZE | DEMY |
| PAGES | 200 |
| PUBLISHER | AKHAND PUBLISHING HOUSE |
